उस समय रूस और ईरान ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया था। इस नए निर्णय से इदलिब में मानव त्रासदी को रोक दिया गया।
बंद दरवाज़ों के पीछे जिन विषयों पर तुर्की और रूस के राष्ट्रपतियों ने चर्चा की है उनके बारे में अनेक महत्वपूर्ण सवाल पैदा हो रहे हैं।
- सीरिया और तुर्की की सीमा पर सीरिया के भीतर बस किलोमीटर चौड़ी पट्टी बनाए जाने की बात पर सहमति हुई है जिसमें कोई हथियार नहीं होगा। यह पट्टी बनाने का लक्ष्य क्या है, वहां किसको रखा जाएगा? क्या वहां इदलिब के नागरिकों को रखा जाएगा ताकि बाद में होने वाली लड़ाई से उन्हें दूर रखा जाए या वहां विद्रोहियों को एकत्रित कर दिया जाएगा?
- सैनिक आप्रेशन स्थगित करने के बाद रूस ने तुर्की से क्या क़ीमत हासिल की है।
- अन्नुस्रा फ़्रंट तथा अन्य चरमपंथी संगठनों का क्या अंजाम होगा? क्या तुर्क सेना उनका सफ़ाया करेगी?
- हथियार रहित पट्टी की उम्र कितनी होगी? यह पट्टी सीरियाई सरकार के नियंत्रण में कब लौटेगी? क्या सीरियाई सेना से अलग तुर्की और रूस की सेनाएं इस पट्टी की सुरक्षा का कार्यभार संभालेंगीं?
- इस शिखर वार्ता के समय वहां मौजूद पत्रकारों को रूसी और तुर्क राष्ट्रपति से सवाल पूछने का अवसर क्यों नहीं दिया गया? बस पत्रकारों को यह बताया गया कि सीमा पर बीस किलोमीटर चौड़ी एक पट्टी बनाई जाएगी जहां किसी प्रकार का हथियार नहीं होगा।
- इदलिब के बारे में तुर्क और रूसी रक्षा मंत्रियों ने एक दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए हैं। इस दस्तावेज़ में क्या है और किस प्रकार की गैरेंटी दोनों पक्षों ने एक दूसरे को दी है?
- तुर्क राष्ट्रपति ने बयान दिया है कि वह पड़सियों के साथ अच्छे पड़ोस के सिद्धांत पर संबंध रखेंगे, यह पड़ोसी देश कौंन हैं यह अच्छे संबंध किस प्रकार के होंगे? क्या वह सीरिया की बात कर रहे हैं या ईरान की या फिर दोनों की?
हमने इन सवालों के जवाब हासिल करने के लिए तुर्की, सीरिया और रूस में अपने सूत्रों से संघन बातचीत की कुछ जवाब मिले और कुछ नहीं मिल सके। जो जवाब मिले उन्हें सात बिंदुओं के रूप में बयान किया जा सकता है।
- इदलिब में मौजूद सारे हथियारबंद लड़ाके वहां से निकलकर तुर्की और इदलिब की सीमा पर बनी पट्टी में चले जाएंगे और इदलिब शहर को पूरी तरह ख़ाली कर देंगे।
- तुर्की और रूस की सहमति से इदलिब सीरियाई सरकार के नियंत्रण में लौट आएगा।
- तुर्की की मांग के अनुसार रूस सीरिया के भीतर और बाहर कुर्द फ़ोर्सेज़ से हर प्रकार की समन्वय समाप्त कर देगा।
- रूस और अमरीका के बीच यह सहमति बनी है कि तनफ़ नामक मरुस्थल में जितने भी हथियारबंद लड़ाके हैं उन्हें वहां से इदलिब की सीमा पर बनी इसी पट्टी में स्थानान्तरित किया जाएगा और अमरीका रकबान इलाक़े में अपने सैन्य ठिकाने को समाप्त कर देगा।
- इदलिब से सारे भारी हथियार बाहर निकाले जाएंगे और इस संदर्भ में तुर्की स्पष्ट रूप से अपने वादे पर अमल करेगा।
- राष्ट्रपति अर्दोग़ान को 9 दिसम्बर तक की मोहलत दी जाएगी जिसके बीच में वह इस संदर्भ में अपनी सभी प्रतिबद्धताएं पूरी करेंगे। यदि वह प्रतिबद्धता पूरी न कर पाए तो फिर सैन्य आप्रेशन का रास्ता चुना जाएगा।
- एक सवाल यह भी है कि जब सीमावर्ती पट्टी में सभी चरमपंथियों और लड़ाकों को एकत्रित कर दिया जाएगा तो फिर उनके साथ क्या बर्ताव होगा? क्या उन सब का बाद में सफ़ाया कर दिया जाएगा? या उन्हें विशेष रूप से तुर्कमन जाति के लड़ाकों को तुर्की में जगह मिलेगी? क्या विदेशी लड़ाकों को अर्थात जो यूरोप से, फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों से, रूस और चीन से आए हैं उन्हें उनके देशों के हवाले कर दिया जाएगा?
यह तय है कि रूसी और तुर्क राष्ट्रपतियों के बीच जो ख़ुफ़िया समझौता हुआ है उसके बारे में कोई घोषणा आने वाले महीनों में नहीं की जाएगी।
रूसी नेतृत्व की ओर से तेहरान और दमिश्क़ से संपर्क साधा जाना यह दर्शाता है कि इस समझौते पर अमल शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में इसके बारे में कुछ चीज़ें संभावित रूप से मीडिया के हाथ लगेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस समझौते ने मानवा त्रासदी को रोक दिया और यह बहुत अच्छी बात है जिसकी सराहना करनी चाहिए मगर कब तक? यह ईश्वर की जानता है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार